मैने इस बार थोड़ा अलग तरीका अपनाया यात्रा ब्रेक करके टिकट किया। मैने एयर एशिया से टिकट कराया था जो रात में 9 बजे लखनऊ से 11 बजे के आस पास बैंगलोर पहुंचना और पुनः सुबह 4 बजे बैंगलोर से पुणे के लिए फ्लाइट थी। तो इस तरह से मैं ब्रेक जर्नी का अनुभव लेने के लिए ऐसे टिकट किया।
इस कार्य हेतु कार्यालय से 5 दिन की छुट्टी लिया था। बहरहाल निर्धारित तिथि 27 मई को शाम को 6 बजे बादशाह नगर रेलवे स्टेशन से मेट्रो पकड़कर चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट लखनऊ पहुंच गया। सबसे पहले बैग चेक इन किया तो वहां से जानकारी ली कि क्या हमें लगेज बैंगलोर में भी लेना पड़ेगा। उत्तर मिला नहीं, लगेज आपको सीधे पुणे में ही मिलेगा। बैंगलोर एयरपोर्ट पर आपको सिक्योरिटी चेक से गुजरना पड़ेगा।
दोनों जगहों का बोर्डिंग पास यहीं दे दिया गया लेकिन बंगलोर में किस गेट से फ्लाइट पकड़नी है, वो नहीं लिखा था। बताया गया कि वहीं पर पता चलेगा। खुशी हुई कि दोनों फ्लाइट में सीट खिड़की वाली मिली। लखनऊ में गेट नंबर 2 रहा जिससे गुजरकर बस में बैठकर फ्लाइट तक पहुंचाया गया। इस बीच सिक्योरिटी चेक में सीआईएसएफ द्वारा मेरे बैग के सेविंग किट में रखा कैंची निकलवा दिया गया जिसका मुझे मलाल हुआ। हालांकि वो कोई खास कीमती नहीं था लेकिन पैसे का नुकसान चल जाता है लेकिन वस्तु का नुकसान थोड़ा तकलीफ देता है।
जैसे ट्रेन की यात्रा में पीछे जाता पेड़, खेत, व्यक्ति, शहर देखना अच्छा लगता है ठीक उसी तरह फ्लाइट में जब विमान उड़ने के लिए रनवे पर स्पीड पकड़ती है और उड़ती है तो वो एक अनूठा अनुभव होता है। उसे बार बार लेने की इच्छा होती है। विमान धीरे धीरे चलकर रनवे पर आता है और अचानक अनाउंस के बाद स्पीड पकड़ती है। हां उस समय तेज आवाज बताने के लिए पर्याप्त होता है ईंजन की क्या हालत होगी। विमान उड़ान भरी और अपने प्यारे शहर को नीचे देखना आकर्षक लगा।
निर्धारित समय पर कैम्पा गौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बैंगलोर पहुंच गया। एराइवल से बाहर निकलते हुए पूछ लिया कि किस तरफ से फिर इंट्री करनी है। एक बार को इच्छा हुई कि बाहर निकलकर बाहर का नजारा लिया जाय लेकिन इरादा त्याग दिया कि कौन रात में घूमेगा और फिर से इंट्री करने का निर्णय लिया। लेकिन जैसे ही इंट्री की ओर बढ़ा एयरपोर्ट की बनावट देखकर दिल बाग बाग हो गया। मन अतिशय प्रसन्न हुआ। विश्वास बहुत ही खुबसूरत बना है। दरअसल वहां दो टर्मिनल है। टर्मिनल 1 जो पुराना है और 2 जो हाल ही में बना है। मैं टर्मिनल 2 पर था।
अंदर जाते समय गेट पर कहा गया कि इतनी जल्दी क्यों जा रहे है। मैने कहा कहां बाहर घूमूं, अंदर ही बैठा जाय। इस तरह पूरा प्रॉसेस करने के बाद अंदर आ गया और यह एयरपोर्ट अंदर से और भी खूबसूरत है।
रात में 12 सोचा पेट पूजा की जाय तो वहां के महंगे रेस्टोरेंट में सैंडविच और कॉफी लिया जो लगभग 900 रुपए का पड़ा। लेकिन ऐसी महंगाई सहन की जा सकती है।
गेट नंबर 5 से फ्लाइट में बैठना था जो सीढ़ियों से नीचे उतर कर था। मैने उपर ही बैठने का निर्णय लिया। गेट नंबर 12 के पास आराम कर कुर्सी रही जहां लेट गया और ब्लूटूथ लगाकर पसंदीदा गाने का लेने लगा। सामने स्थित शीशे से एयरपोर्ट का पूरा नजारा दिख रहा था। कुछ देर बाद गेट नंबर 5 के पास ही आ गया। बैंगलोर एयरपोर्ट पर एक अच्छी चीज है और वो है कुर्सियों के बीच लगा चार्जिंग प्वाइंट और हमने मोबाइल चार्जिंग में लगाकर ऊंघने लगे। सामने बोर्ड पर तमाम फ्लाइट की जानकारी देखता रहा।
इस गेट से एक हैदराबाद की भी फ्लाइट उड़ी थी। थोड़े देर बाद मेरी फ्लाइट की अनाउंस हुआ और हम लाइन में लग गए फ्लाइट में बैठने के बाद नींद आने लगी। निर्धारित समय पर पुणे पहुंच गया लेकिन वहां अनुभव बहुत कड़वा हुआ और वो अनुभव हुआ ओला कैब का। दूरी मात्र 3 किलोमीटर की रही लेकिन क्या कहे पहली चीज तो गाड़ी ही खराब रही बार बार बंद हो जा रही थी, दूसरी चीज बहुत देर तक इंतजार करवाया, बार बार बंद हो जाने के कारण कैब को गंतव्य से पहले ही छोड़ दिया लेकिन चार्ज हुआ 324 रुपए।
यहां पहुंचने के बाद पुणे शहर के सबसे अच्छे डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए लोकप्रिय स्थल जोशी फॉर्म पहुंचे। जहां बहुत ही ज्यादा मस्ती की गई।
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